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yah jamee hai mandir…

आगरा(arohanlive.com) । कोरोना संक्रमण और चुनावी शोरगुल के बीच गणतंत्र दिवस की तैयारियां फिलहाल शांत पड़ी हुई हैं। ऐसे में राष्ट्रभक्ति से सराबोर गीत- यह जमीं है मंदिर का आनन्द लीजिए। गीत के रचनाकार हैं- प्रख्यात साहित्यकार, कवि, लेखक एवं विचारक श्री विश्वेश्वर दयाल अग्रवाल।

 

यह जमीं है मन्दिर…

(श्री विश्वेश्वर दयाल अग्रवाल)

 

यह जमीं है मन्दिर,

मां अम्बे के दिल का टुक़ड़ा है,

दिल धड़कता है इसके अन्दर,

आत्मा छूने की ताकत है,

सीता, राधा, भारती नाम इसके,

सौ करो़ड़ों की माता है।

भ्रष्टाचार के तेलों से न जलेंगे,

मां भारती के दिये,

कपूतों को बताना होगा,

काटने होंगे इनके पंख,

जमीं पर लाना होगा,

पाप को जड़ से मिटाना होगा।

कोई भी ऊंचा नहीं मां भारती से,

फरेबी, बेईमानों को बताना होगा,

यह जमीं है देवालय,

किसी एक की मिल्कियत नहीं,

यह मन्दिर मां भवानी का, असंख्यों की माता है,

भ्रष्टाचार के तेलों से न जलेंगे मां भारती के दिये,

पापियों को बताना होगा।।

यह जमीं है मन्दिर…

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