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Sad Guru Brahma…

आगरा (arohanlive.com) । श्रीअरविंद ने पांच दिसंबर 1950 की रात 1 बजकर 26 मिनट पर पृथ्वी की चेतना से एकात्म कर अपने शरीर को छोड़ दिया था। समाधि दिवस के इस मौके पर श्री अरविंद दर्शन के महान विचारक, साहित्यकार, कवि एवं लेखक श्री विश्वेश्वर दयाल अग्रवाल द्वारा रचित श्री अरविंद को समर्पित एक भजन।

सद् गुरु ब्रह्म…

(श्री विश्वेश्वर दयाल अग्रवाल)

 

सद् गुरु नेमि पूरन योगी,

सद् गुरु कोटि भगवाना,

सद् गुरु पद परमेश्वर,

सद् गुरु रवि चेतन के,

सद् गुरु द्वार मुक्ति के,

सद् गुरु कल्याण स्वरूपा।

श्री अरविंद नाम पूरन योगी,

श्री अरविंद नटराज स्वरूपा,

श्री अरविंद घट-घट के वासी,

श्री अरविंद करुणा के सागर,

श्री अरविंद रक्षक भक्तन के,

श्री अरविंद धन्वंतरि सब व्याधिन के।

जो कोई श्री अरविंद शरण गति आवै,

पूरन सत्य को निश्चय पावै,

चढ़े जहाज श्री अरविंद चेतन,

भव सागर तर जावै,

बाहिर आवै अंधियारे ते,

मन आलोकित हो जावै।

छुट्टी मिले काल-माया ते,

मां सावित्री घर आवै,

सिद्ध हों सभी कार्य भक्तों के,

श्री गुरु चेतन से आत्मा पावै,

बन्धन खुलें जीवात्मा के,

सद् गुरु कृपा से  मुक्ति पावै।।

ऊं श्री अरविंदाय नमः…

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